Ranjit Warrier for the Blank Noise Blogathon (2006)

Given the recent blogathon to raise awareness of 'eve-teasing', or harassment (both verbal and physical) that women in Indian cities are exposed to while going about their daily lives, I decided to write something about self-defense. I'm very interested in defence affairs, both of nations as well as individuals, and it's been a long-standing arguement of mine that women have to be given self-defense lessons in school. For too long we have kept our women actively away from sports and physical disciplines for no good reason. I would like a revival of our ancient martial arts (heh heh of course I pick the mallu one), taught compulsarily to girls in school, and any guys who would like to learn. This would go a long way in ensuring a population that has the confidence to take care of itself. No more of nobody will marry a girl who has bruises on her knees and stuff like that. If our roadside romeos know that the girl can fight back, I'm sure they will think a few times before commenting. Or maybe not, and they get bashed up for it. Either way, the streets/buses will be a safer place. I want to commend the blogathon organizers because as long as people don't talk about it, it will remain a problem. After all, the Rani of Jhansi wasn't that far back in history.

थोडे दिनों पहले २०० भारतीय महिलाओं ने अपने संकट बताए ईव-टीसिंग से। मुझे भी नहीं पता था कि यह इतनी बड़ी समस्या है, उनके कहने से पता लगा कि महिलाऐं जब बाहर जातीं हैं तो उनहें बड़ी धिक्कत होती है लोगों के बातें सुनकर और उनपर हमला भी होता है। लड़का होने के कारण मैंने कभी यह महसूस नहीं किया लेकिन अगर मैं उनके जगह होता तो मुझे बहुत गुस्सा आता और ज़रूर मारा-मारी हो जाती। मेरे पास इस समस्या का हल है, जो मैं बहुत से लोगों को बता चुका हूँ और अब इन्टर्नेट पर कह रहा हूँ। हमें अपने लड़कियों को पाठशाला में लड़ाई कैसे करते हैं यह सिखाना होगा। लड़के तो यह वैसे भी पढ़ जाते हैं, लेकिन लड़कियों को पढाना बहुत ज़रूरी है। इससे अपने गली वाले शेर चूहे बन जाएंगे, अगर नहीं बने तो लड़कीयों के हाथों पिटेंगे। अगर लड़कियाँ अपनी सुरक्षा करना जान जाऐं तो शायद शहरें उनके लिए कम भयानक जगह होंगी। लेकन इस विशय पर चरचा होने से अच्छा ही होगा, अगर उन लोगों को पता चले कि उनके वाक्य और कर्म कितने हानिकारक होते हैं। अपने मर्दों को भी पता चले कि झान्सी की राणी अभी भी भारत मे मौजूद हैं।

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